देश के केन्द्र में स्थित म.प्र. एक बड़ा राज्य है तथा चारों तरफ से पाच विभिन्न राज्यों से धिरा हुआ है। देश के अन्य राज्य की तुलना में मध्यप्रदेश में वनों की बहुलता है। प्राकृतिक संसाधनों से आच्छादित है। अतः इस राज्य में शिक्षा, उद्योग, कृषि तथा वन के विकास की अपार संभावनायें है। प्रदेश में इन प्राकृतिक संसाधनो के समग्र उपयोग एवं प्रबंधन के लिये क्षेत्रों को चिन्हित करना आवष्यक है। इस कार्य के लिये परिषद ने इस योजना के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों का अध्ययन करने का प्रस्ताव बनाया है। प्रदेश के चार मुख्य क्षेत्रों ग्वालियर, जबलपुर, इन्दौर एवं रीवा में क्षेत्रीय विस्तार केन्द्रों की स्थापना की गई है।

उद्देष्य

  • क्षेत्रीय विस्तार केन्द्रों के लिये निर्धारित कार्यक्रम विवरण के अनुसार कार्य करना।
  • परिषद् द्वारा स्वीकृत विभिन्न सेमीनार/कान्फ्रेन्स/परियोजना इत्यादि में भागीदारी सुनिष्चित करना एवं इस हेतु प्रोजेक्ट डिवीजन से समन्वय करना।
  • उस क्षेत्र के विज्ञान के नवचारी को चिन्हित करना एवं पेटेन्ट हेतु प्रोत्साहित करना।
  • क्षेत्र के उत्कृष्ट कारीगर, किसान, महिलाओं को चिन्हित करके उनके कौषल को प्रोत्साहन एवं सहयोग प्रदान करना।
  • महत्वपूर्ण दिवसों जैसे नर्मदा जयंती, विज्ञान दिवस, प्रौद्योगिकी दिवस, विष्वकर्मा जयंती इत्यादि में भागीदारी एवं कार्यक्रम आयोजित करना।
  • क्षेत्र में हो रही विद्यालय/महाविद्यालय/विष्वविद्यालय आदि की गतिविधयों में विज्ञान से संबंधित सेमिनार इत्यादि में भागीदारी करना एवं मटीरियल का संग्रहण कर कार्यालय में रखना।
  • कार्यालय में अधिक से अधिक आगन्तुक, आॅफिसिअलस्, एन.जी.ओ. को विजि़ट कराना एवं उन्हें परिषद् से संबंधित जानकारी, फार्म इत्यादि उपलब्ध कराना एवं उनको भरने में मदद करना।
  • क्षेत्रीय स्तर पर ऐसी सम्भावनाओं का पता लगाना, जिसमें विज्ञान एवं तकनीकी का उपयोग करके वहा के अ.जा/अ.ज.जा./पिछड़ा वर्ग एवं कमजोर वर्गो के आर्थिक उत्थान हेतु अपने सुुझाव सहित प्रस्ताव प्रेषित करना।
  • जिला स्तर पर जिला योजना समिति की बैठकों में भागीदारी करने हेतु उचित स्तर पर संपर्क कर स्थिति से अवगत कराना।
  • परिषद् द्वारा दिये अन्य कार्य।